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Tuesday, October 19, 2021
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Jalandhar Son Of Lord Shiva

HOW JALANDHAR BORN

Once upon a time, Devta’s King Indra Went to Mount Kailash to meet Lord Shiva Along with Deva’s Preceptor(देव गुरु) Brihaspati. Lord shiva come to know about their arrival and wanted to test Indra’s Devotion.

Lord shiva Changed his look and sit on the edge-of -Mount Kailash. But Indra did not recognize Lord shiva. Indra filled with full ego. Indra, again and again, tell get out of my way. Lord Shiva sat quietly without replying to his question. After Indra become angry and tried to attack lord shiva with his weapon Vajra.
Lord Shiva turned angry paralyzed the hand of Indra by using his divine power. Shiva’s third eye turned to anger and his angry fire attack Indra. Indra is frightened. Sage Brihaspati apologized to lord shiva on behalf of her disciple  (शिष्य).
On the wish of sage Brihaspati lord, shiva diverted the power of his third eye to the ocean.
So, the angry fire merged in the ocean and was picked up by (Matsya Kanya). Jalandhar was born to give punishment for wrong deeds to Indra.

When Indra comes to know that Indra attacked with his weapon (Vajra) in the course his mother came between and died. After his mother died he becomes angry and wants to know the criminal who killed his mother. After that Asura’s Guru, Shukracharya Raised him and later he became Asura’s King and Trilok adipate. And defeated Indra as well in war.

Jalandhar Married

He married Vrinda (TULSI), daughter of asur raj “Kalnami”.When he becomes the king of three loke. He thinks that he is more powerful than all devas and Trimurti. When he knows about his birth that he is shivansh.His rising ambition is to kill lord shiva to become Trimurti. Because of wrong thinking towards a god he thinks that all deva’s and Trimurti Mahadev are Deceptive and coward.

MAHADEV KILL HIS DEMON SON 

Once vrinda organized a puja (worship)for Jalandhar’s protection and make him immortal and never defeated by Parvati,Mahadev, and any devas. So Lord Vishnu took Jalandhar’s form and joined the puja and devastated everything for Jalandhar when vrinda know about this.
She becomes angry and cursed Lord Vishnu that he will suffer to his wife as she was suffered for his husband. Lord vishu easily takes his curse and blessed her that she will remember for their honesty and reversible dharma and will be workship in the form of tulsi with him.
Then she committed suicide. When Jalandhar know about his death he becomes angry and attacks mount Kailash with his demon army and yamraj
In War, Jalandhar defeated all devas and son of lord shiva Ganesh and Kartikeya. After many years of fight, he was killed by goddess parvati and lord shiva by his combined power.
During his last breath, Mahadev gives the right lesson to Jalandhar and he found his mother and wife present in Mahadev. Because all the universe present in Mahadev. Jalandhar apologizes to Mahadev and goddess Parvati. Parvati gives blessing to Jalandhar After shivansh angry fire Jalandhar merged into the third eye of lord shiva.

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5 COMMENTS

  1. […] एक समय की बात है जब पृथ्वीराज सिंह चौहान सुबह-सुबह माता के दर्शन  करने मंदिर जाया करते थे उसी समय उन्होंने माता के मंदिर पर ताजे फूल चढ़े हुए देखें फिर उन्होंने यह सोचा कि मेरे से पहले यहां कौन आता है |जो सबसे पहले माता के दर्शन करता है और ताजे फूल चढ़ाकर जाता है। इस बात को जानने  की   उत्सुकता में उन्होंने यह सोचा कि मैं मंदिर में सबसे पहले जाऊंगा और देखूंगा कि सबसे पहले माता को कौन फूल चढ़ाता है। तभी उन्होंने छुप कर देखा कि सुबह-सुबह एक  बहुत अजीब और लंबा इंसान आता है| माता के दर्शन करने जो कि इस युग से बिल्कुल ही अलग है। तभी उन्हें पता चला कि यह  महाभारत काल के योद्धा अश्वत्थामा है|  जिसे भगवान श्रीकृष्ण ने श्राप दिया था युगों युगों तक भटकने का सभी पृथ्वीराज चौहान उनके सामने आ गए और उन्हें प्रणाम किया| और उनसे यह प्रणाम किया कि है,महा योद्धा अश्वत्थामा आपको कोटि-कोटि प्रणाम आपसे मेरे दर्शन हुए मैं सफल हो गया| और उनसे यह कहां की है महा योद्धा अश्वत्थामा आप से मेरी मुलाकात हुई है उसके पीछे एक विशेष कारण है|  आप जाते जाते मुझे कुछ  विद्या दे |  फिर अश्वत्थामा ने कहा हे राजन मैं तुम्हें कुछ नहीं सिखा सकता इस युग में सारी शक्ति   समाप्त हो गई है मनुष्य युगांतर में जी रहा है। फिर भी पृथ्वीराज चौहान के बार-बार आग्रह करने के कारण महा योद्धा अश्वत्थामा ने उनसे कहा कि मैं तुम्हें शब्दभेदी बाण चलाने की विद्या प्रदान करता हूं।  तब  पृथ्वीराज चौहान ने उन्हें प्रणाम किया और यह विद्या उनसे ग्रहण की। और इसी शब्दभेदी बाण  कि विद्या से उन्होंने अफगानी मुल्क के कायर मोहम्मद गौरी को मार गिराया। jalandhar-the-demon-son-of-lord-shiva […]

  2. […] एक समय की बात है जब पृथ्वीराज सिंह चौहान सुबह-सुबह माता के दर्शन  करने मंदिर जाया करते थे उसी समय उन्होंने माता के मंदिर पर ताजे फूल चढ़े हुए देखें फिर उन्होंने यह सोचा कि मेरे से पहले यहां कौन आता है |जो सबसे पहले माता के दर्शन करता है और ताजे फूल चढ़ाकर जाता है। इस बात को जानने  की   उत्सुकता में उन्होंने यह सोचा कि मैं मंदिर में सबसे पहले जाऊंगा और देखूंगा कि सबसे पहले माता को कौन फूल चढ़ाता है। तभी उन्होंने छुप कर देखा कि सुबह-सुबह एक  बहुत अजीब और लंबा इंसान आता है| माता के दर्शन करने जो कि इस युग से बिल्कुल ही अलग है। तभी उन्हें पता चला कि यह  महाभारत काल के योद्धा अश्वत्थामा है|  जिसे भगवान श्रीकृष्ण ने श्राप दिया था युगों युगों तक भटकने का सभी पृथ्वीराज चौहान उनके सामने आ गए और उन्हें प्रणाम किया| और उनसे यह प्रणाम किया कि है,महा योद्धा अश्वत्थामा आपको कोटि-कोटि प्रणाम आपसे मेरे दर्शन हुए मैं सफल हो गया| और उनसे यह कहां की है महा योद्धा अश्वत्थामा आप से मेरी मुलाकात हुई है उसके पीछे एक विशेष कारण है|  आप जाते जाते मुझे कुछ  विद्या दे |  फिर अश्वत्थामा ने कहा हे राजन मैं तुम्हें कुछ नहीं सिखा सकता इस युग में सारी शक्ति   समाप्त हो गई है मनुष्य युगांतर में जी रहा है। फिर भी पृथ्वीराज चौहान के बार-बार आग्रह करने के कारण महा योद्धा अश्वत्थामा ने उनसे कहा कि मैं तुम्हें शब्दभेदी बाण चलाने की विद्या प्रदान करता हूं।  तब  पृथ्वीराज चौहान ने उन्हें प्रणाम किया और यह विद्या उनसे ग्रहण की। और इसी शब्दभेदी बाण  कि विद्या से उन्होंने अफगानी मुल्क के कायर मोहम्मद गौरी को मार गिराया। jalandhar-the-demon-son-of-lord-shiva […]

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