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Tuesday, October 19, 2021
Homespritual talksभगवान परशुराम अस्त्र "फरसा"

भगवान परशुराम अस्त्र “फरसा”

BHAGWAN PARSHURAM GAYTRI SHLOK”

ॐ जमदग्नये विद्महै महाविरायेयदि महि तणो परशुरामः प्रचोदया

भगवान विष्णु के दशावतार में छठे अवतार भगवान परशुराम माने जाते हैं। क्रोध और दानशीलता में उनका कोई सानी नहीं है। शस्त्र और शास्त्र के ज्ञाता सिर्फ और सिर्फ भगवान परशुराम ही माने जाते हैं। भगवान शिव ने उन्हें मृत्युलोक के कल्याणार्थ परशु अस्त्र प्रदा‍न किया जिससे वे परशुराम कहलाए। वे परम शिवभक्त थे।

 परशुराम अस्त्र “फरसा”

आप ने जब भी भगवान् परशुराम से सम्बंदित कही  बार  पौराणिक कथा सुनी होगी तब आप ने उनके विनाशकारी  और घातक अस्त्र “फरसे” के बारे में जरूर सुना होगा|  वही फरसा जिससे परशुराम भगवान ने अपने पिता महृषि जमदग्नि के हत्यारे राजा सहस्त्र बहू अर्जुन का वध किया था वही फरसा जिसके बल पर उन्होंने २१ बार धरती को पापी और अत्याचार्री क्षत्रिय राजाओ से मुक्त  किया था| मान्यता के अनुसार भगवन विष्णु के ६ अवतार मह्रिषी परशुराम ने ये अलौकिक फरसा १००० साल पहले भगववान शिव की तपस्या करके उनसे वरदान में प्राप्त किया था| लेकन क्या आप सोच सकते हे की युगो पहले भगवन को मिला वो दिव्य फरसा दुनियां में कही मौजूद हो सकता हे जी हां दरहसल झारखंड राजय के घुमला जिले से कर्रीब 55  कलोमीटर और राजधानी रांची से करीब 150 किलोमीटर  दूर घने जंगलो के बिच स्तित हे  धाम | जहा पर आज भी  आज भी मौजूद हे परशुराम भगवन  का घातक हतियार  फरसा |   

 इस धाम का परशुराम भगवन से गहरा नाता हे | लेकिन आज ये जगह अतिलकसल प्रभावित इलाको में आती हे झारखण्ड की इस्थानीय  भाषा में जो की फरसे को टांगी कहा जाता हे | यही कारण  हे की इस स्थान का नाम टांगी  पड़ा | फरसे  ये यहाँ घड़े होने क पौराणिक कथा बेहत दिलचसब हे |           

कहते हे की परशुराम सीता सवयंबर में श्री राम के धनुष तोड़े जाने से नाराज और अत्यंत क्रोधित हुए और जब उन्हें यहाँ पता चला की श्री राम नारायण के अवतार हे तो वे बहुत शर्मिंदा  हुए और वहा   से निकल  कर पशियताप करने के लिए घने जंगलो के बच चले गए | और वहा अपना फरसा गाड़ कर भगवन  शंकर की तपस्या में लीन हो गये | जहा भगवन ने अपना फरसा गाड़  कर तपस्या  की  थी उसी जगह को टांगी  नाथ  धाम के नाम से जाना जाता हे | यहाँ पर गड़े इस लोहे के  फरसे की  २ बड़ी विशेषताएं   हे |

1 . १००० साल से खुले में रहने के बाव जुत यह  फरसे पर आज तक जंग का एक भी निशान तक नहीं हे|    

         2 . यह फरसा जमीन  में कितना  निचे तक गड़ा हुआ हे इसकी  जानकारी आज तक भी किसी  को नहीं हे | कही बार इसकी गहराई को अलग -अलग तर्कों से नापने की  कोशिश कि  गयी हे| लेकिन हर बार असफलता प्राप्त  हुई हे

          3 . एक बार इस  क्षेत्र में रहने वाली लोहार जाती  ने इसे काटने की कोशिश की  थी वो लोग फरसे को काट तो नहीं  पाए लेकिन उनकी जाती के लोगो को इस दुसाहस की भरी कीमत चुकानी पड़ी  ररहस्यमें तरीके से एक-एक करके लोहरो की  मौत होने लगी इस घटना से डर कर लोहार जाती के लोगो ने ये छेत्रृ छोड़ दिया और आज भी इस धाम से 15  किलोमीटर  की परिध  में  लोहार नहीं बसते

  • हम अपन ऐतहासिक और पुरतात्विक धरोहरों के प्रति कितने लापरवाह हो गए हे| टांगी नाथ धाम इसका एक  जीता-जगता उधार्रण हे | यहाँ पर सेकड़ो की संख्या में प्रचीन “शिवलिंग ” और मुर्तिया बिखरी पड़ीं दिखती हे |
  •   इन शिवलिंग की सुरक्षा और उनके रखरखाव का ख्याल का कोई प्रबंध नहीं हे | इनकी ऐसी इस्थिति देख कर अंदाजा लगाया जा सकता हे की  अब तक कितनी पुरासम्पदा गलत हाथो में जा चुकी हे | १९८९ पुरात्तव विभाग  में टांगी  नाथ  धाम में खुदाई की थी खुदाई में उन्हें सोने चांदी  के आभूषण  समेत कही मुर्तिया और मूलयवान वस्तुए  मिली लेकिन कुछ अज्ञात कारणों से यह पर खुदाई बंद कर दी गयी | खुदाई में हिराजरित मुकुट और चांदी  का अर्थ गोलाकार , सिक्का, सोने का कड़ा , कान  की  सोने की  बाली,और एक ताम्बे का बना टिफिन मिला जिसमे टिल और चावल रख हुआ था| आज ये सब चीजे डुमरी ठाणे में रखी हुई हे लेकीन सन्देह  पैदा करने वाली और हैरान करने वाली बात यह हे क जब यह से इतनी मूल्यवान चीजे मिल रही थी|  तब  क्यों खुदाई को बंद कर दिया गया |  हो सकता हे की  यह और खुदाई  की जाती तो यह के बारे में और जानकर मिलती  और रहस्यमई फरसे के बारे में और जानकारी मिलती
  •             १ टांगी धाम के विशाल क्षेत्र में फैले हुए अनगिनत  अवशेह यह  बताने के लिए काफी हे की ये क्षेत्र किसी ज़माने में हिन्दुओ का एक प्रमुख तिर्त रहा होगा |  लेकन किसि अज्ञात कारण  से ये क्षेत्र खंडर  में तब्दील हो गया | और भक्तो  का यह आना कम  हो गया|  रही सही कसल सरकारी उपेक्षा और नक्सल वाद ने पूरी कर दी यहाँ आप को बताते चले की तंगी नात  की दशा तब हुई जब 2014 में धाम का विकास करने और सौन्दर्यीय करण के लिए झारखंड सरकार के पर्यटन विभाग ने घुमला जिला प्रशासन को ३३,00,000RS  आवंटित किया थे |
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